निजी ज़मीन पर इबादत संविधानिक अधिकार: हाई कोर्ट

WeeHours Breaking I प्रयागराज। उत्तर प्रदेश की इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मंगलवार को एक अहम फैसले में स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति या समुदाय अपनी निजी ज़मीन या निजी परिसर में पूजा-पाठ, नमाज़ या अन्य धार्मिक प्रार्थनाएं कर सकता है और इसके लिए राज्य सरकार या प्रशासन से पूर्व अनुमति लेने की कोई आवश्यकता नहीं है। अदालत ने कहा कि यह अधिकार भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों का हिस्सा है। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया कि जब धार्मिक गतिविधियां पूरी तरह निजी परिसर तक सीमित हों और उनसे सार्वजनिक शांति, कानून-व्यवस्था या दूसरों के अधिकार प्रभावित न हों, तो प्रशासन द्वारा उन पर रोक लगाना असंवैधानिक होगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि सामान्य परिस्थितियों में ऐसे मौलिक अधिकारों को सीमित नहीं किया जा सकता। इस फैसले को धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार की दिशा में एक महत्वपूर्ण नजीर माना जा रहा है, जो निजी स्तर पर आस्था के पालन को संवैधानिक संरक्षण प्रदान करता है।