Md Imran I पटना I 13 जनवरी I
बिहार की राजधानी पटना में एक 18 वर्षीय छात्रा की संदिग्ध मौत ने पूरे शहर को हिला कर रख दिया है। मेदांता अस्पताल में छात्रा की मौत के बाद सोमवार रात सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस, हॉस्टल प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन पर मिलीभगत का गंभीर आरोप लगाया और हॉस्टल मालिक की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की।
मृत छात्रा जहानाबाद की रहने वाली थी और पटना के एक गर्ल्स हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रही थी। परिजनों के मुताबिक वह 5 जनवरी 2026 को ही अपने हॉस्टल लौटी थी। महज 24 घंटे बाद, 6 जनवरी की शाम करीब 4 बजे हॉस्टल प्रशासन ने परिवार को फोन कर बताया कि लड़की अपने कमरे में बेहोश मिली है और उसे अस्पताल ले जाया जा रहा है। लेकिन परिवार जब पटना पहुंचा तो हालात कुछ और ही कहानी कह रहे थे।
मृतका के मामा का आरोप है कि लड़की को अस्पताल ले जाने से पहले न पुलिस को सूचना दी गई, न कमरे की वीडियोग्राफी कराई गई। पहले उसे प्रभात अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां दो दिन तक हालत सामान्य बताई जाती रही। फिर अचानक डॉक्टरों का रुख बदल गया। परिजनों का कहना है कि हॉस्टल मालिक प्रभावशाली व्यक्ति है और उसने पूरे मामले को दबाने के लिए अस्पताल को ‘मैनेज’ कर लिया।
बाद में लड़की को मेदांता अस्पताल लाया गया, जहां चार दिन तक परिवार को उससे मिलने तक नहीं दिया गया। आखिरकार डॉक्टरों ने शरीर में जहर की पुष्टि करते हुए मौत घोषित कर दी। वहीं पुलिस हॉस्टल से बरामद नींद की गोलियों के आधार पर ओवरडोज की बात कह रही है, जबकि परिवार गैंगरेप और हत्या की आशंका जता रहा है।
इस पूरे मामले में 9 जनवरी को रेप का केस दर्ज कराया गया था। अब इंसाफ की मांग को लेकर लोग सड़कों पर हैं। कारगिल चौक पर देर रात तक हंगामा चलता रहा। सवाल सिर्फ एक है—क्या एक बेटी की मौत को सिस्टम मिलकर दबा रहा है?