Md Imran I नई दिल्ली | 13 जनवरी 2026 I
इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जेक्टिव स्टडीज (IOS) के संस्थापक और चेयरमैन डॉ. मोहम्मद मंज़ूर आलम के निधन पर जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के अध्यक्ष सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने इस निधन को भारतीय मुस्लिम समाज और इस्लामी बौद्धिक परंपरा के लिए एक बड़ी क्षति बताया।
अपने शोक संदेश में सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने कहा कि डॉ. मंज़ूर आलम एक गंभीर चिंतक, दूरदर्शी संस्था-निर्माता और समाज के प्रति समर्पित सेवक थे। उन्होंने कहा कि उनका जीवन बौद्धिक ईमानदारी, नैतिक स्पष्टता और ज्ञान के प्रति अटूट विश्वास से भरा हुआ था, जिसे वे समाजिक न्याय और सशक्तिकरण की नींव मानते थे।
उन्होंने कहा कि डॉ. आलम ने केवल विचार नहीं दिए, बल्कि मजबूत संस्थान खड़े किए। उनका मानना था कि समाज भावनाओं या नारेबाज़ी से नहीं, बल्कि गहन शोध, भरोसेमंद आंकड़ों और सिद्धांतों पर आधारित संवाद से आगे बढ़ता है। IOS के माध्यम से डॉ. आलम ने भारत में मुस्लिम बौद्धिक विमर्श के लिए एक स्थायी मंच तैयार किया, जिसने अकादमिक अनुशासन, आत्मविश्वास और सभ्यतागत चिंतन को बढ़ावा दिया। उन्होंने कई पीढ़ियों के विद्वानों को ईमानदारी से समाज का अध्ययन करने और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बहस में रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।
सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने कहा कि बीमारी के बावजूद भी डॉ. आलम मानसिक रूप से सक्रिय और नैतिक रूप से दृढ़ बने रहे। उनकी विनम्रता, धैर्य और संस्था-निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता ने उन्हें व्यापक सम्मान दिलाया। उन्होंने कहा कि डॉ. मंज़ूर आलम की ज़िंदगी यह सिखाती है कि आस्था, नैतिकता और विद्वत्ता से समाज में स्थायी बदलाव लाया जा सकता है।
अंत में उन्होंने अल्लाह से दुआ की कि वह डॉ. मंज़ूर आलम को जन्नत अता करे और उनके परिवार व अनुयायियों को इस दुख को सहने की ताकत दे।