Md Imran I 4 जनवरी I दिल्ली I जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने अपने मुख्यालय में हुई मासिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में देश के मौजूदा हालात को लेकर चिंता जताई है। संगठन ने कहा कि देश में लगातार बढ़ता सांप्रदायिक तनाव, अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा और सर्दियों में गरीबों की परेशानियां गंभीर मुद्दे बनते जा रहे हैं।
प्रेस से बात करते हुए जमाअत के उपाध्यक्ष प्रो. सलीम इंजीनियर ने कहा कि भारत हमेशा से अलग-अलग धर्मों और समुदायों के साथ मिल-जुलकर रहने वाला देश रहा है। हमारी पहचान आपसी भाईचारे और सह-अस्तित्व से रही है। लेकिन आज हालात ऐसे बनते जा रहे हैं, जहां नफरत, सांप्रदायिक बयानबाजी, मॉब लिंचिंग और धार्मिक भेदभाव जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं।
उन्होंने साउथ एशिया जस्टिस कैंपेन की 2025 की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि बीते कुछ समय में धार्मिक अल्पसंख्यकों, खासकर मुसलमानों के खिलाफ हिंसा और दमन के मामलों में तेज़ी से इज़ाफा हुआ है। इसमें भीड़ हिंसा, मनमानी गिरफ्तारियां, तोड़फोड़ और नफरत फैलाने वाले बयान शामिल हैं। कई बार किसी बड़ी घटना के बाद पूरे समुदाय को निशाना बनाया जाता है और सुरक्षा के नाम पर सख्त कार्रवाइयां की जाती हैं।
प्रो. सलीम इंजीनियर ने कहा कि कुछ राजनीतिक ताकतें जानबूझकर समाज को बांटने का काम कर रही हैं और धर्म का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए किया जा रहा है। हालांकि उन्होंने भरोसा जताया कि देश की आम जनता में इतनी समझ है कि वह इस नफरत को नकार सकती है। उन्होंने बताया कि जमाअत लगातार इंटरफेथ संवाद और शांति से जुड़ी पहल कर रही है और साल 2026 को “न्याय, शांति, एकता और सबको साथ लेकर चलने का साल” बनाने की अपील की गई है।
वहीं, सर्दियों की परेशानी पर बोलते हुए जमाअत के उपाध्यक्ष मलिक मोतसिम खान ने कहा कि संगठन उत्तर और पूर्वी भारत में गरीब और बेघर लोगों के लिए कंबल बांटने का अभियान चला रहा है। उन्होंने बताया कि यह मदद बिना धर्म और जाति देखे दी जा रही है।
उन्होंने सरकार से अपील की कि सर्दियों में नाइट शेल्टर बढ़ाए जाएं, गर्म कपड़े और भोजन की व्यवस्था हो और ज़रूरतमंदों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जाएं। साथ ही उन्होंने ईसाई समुदाय के खिलाफ बढ़ती हिंसा और त्रिपुरा में MBA छात्र एंजेल चकमा की लिंचिंग की कड़ी निंदा करते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई और नफरत के अपराधों के खिलाफ कड़े कानून की मांग की।