
MD IMRAN I WeeHours News I दिल्ली I
6 फरवरवरी को संसद के पांचवें दिन बजट सत्र को दौरान समुचे विपक्ष ने अमेरिका से कथित 104 अवैध प्रवासियों को हांथो और पैरों में बेड़ियों में जकड़ कर भारत भेजे जाने के मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ. जिसकी वजह से उच्च सदन की कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही देर बाद दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई थी. इस वजह से सदन में शून्यकाल नहीं हो सका था. पुरा विपक्षी नेताओं ने सदन के बाहर जमकर हंगामा किया. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने PM मोदी पर निशाना साधते हुए यहां तक कह दिया कि “बहुत बात की गई थी कि मोदी जी और डोनाल्ड ट्रंप जी बहुत अच्छे मित्र हैं, फिर मोदी जी ने ऐसा क्यों होने दिया? क्या इंसानों के साथ ऐसा व्यवहार किया जाता है, यह कोई तरीका है'', प्रियंका गांधी ने कहा कि इस मामले में प्रधानमंत्री को जवाब देना चाहिए. AIMIM प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इस मामले पर कहा, "2022 की प्यू रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में भारत के 6 लाख 75 हज़ार लोग बिना दस्तावेज़ के रह रहे हैं ये लोग जब यहां आएंगे तब सरकार उनके लिए क्या करेगी, ये इन्हें देश को बताना पड़ेगा.
आवाज जब उच्च सदन में उठी तो इसकी गुंज पुरे देश ने सुनाई पड़ी. लोगों को लगा कि अब 36 ईंच के कलेजा वाले PM साहब अब आगे से ऐसा नहीं होने देंगे. अब अमेरिकन वायू सेना का विमान इस तरह भारत में नहीं उतरेगा. भारतीयों का अपमान अब आगे नहीं होगा. और सभी शांत बैठ गए. लेकिन ऐसा विल्कूल नहीं हुआ. 10 दिनों बाद 15 फरवरी देर रात फिर से 116 कथित अवैध भारतीय प्रवासियों को लेकर दूसरा अमेरिकी सैन्य विमान अमृतसर हवाई अड्डे पर उतरा. इस समय भी सरकार की खूब किरकिरी हुई. लेकिन इस बार पुरा विपक्ष मौन रहा. अब अगले दिन यानी 16 फरवरी की रात को तकरीबन 10.30 बजे अमृतसर के श्री गुरु रामदास जी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर अमेरिका के तीसरा वायुसेना का सी-17 ग्लोबमास्टर विमान 112 कथित अवैध भारतीय आप्रवासी यानि illegal Indian immigrants को लेकर पहुंचा. हरबार की तरह इस बार भी सभी के हाथों और पैरों में बेड़ियां लगी थी. लेकिन जानकारी के अनुसार विमान का लेंड होने से पहले सभी की बेड़ियां खोल दी गई. यानि पिछले 11 दिनों में अमेरिका ने 332 कथिक अवैध प्रवासियों को वापस इंडिया भेजा. इस बार डिपोर्ट किए जाने वाले लोगों में से 44 हरियाणा से, 33 गुजरात से, 31 पंजाब से, दो उत्तर प्रदेश से और एक-एक लोग उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश से हैं. निर्वासित लोगों ने दावा किया कि पूरे उड़ान के दौरान वे बेड़ियों में बंधे रहे. इस दौरान कथित तौर पर सिख युवक बिना पगड़ी के थे. अब तक तीन उड़ानों से अमेरिका ने कुल 332 अवैध भारतीय प्रवासियों को निर्वासित किया है.
इस बार भी कुछ अवैध प्रवासियों के परिवार वाले उन्हें रिसीव करने के लिए अमृतसर हवाई अड्डे पर पहुंचे. इमिग्नेशन, वेरीफिकेशन और बैकग्राउंड चेकिंग समेत सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद इन प्रवासियों को उनके घर लौटने की अनुमति दी गई. अधिकारियों ने उनको घर तक छोड़ने के लिए ट्रांसपोर्टेशन की व्यवस्था की ऐसा की रिपोर्ट में दावा किया गया है. इसके साथ ही जितने भी अवैध प्रवासी वापस भारत लौटे Airport पर सभी की मुंह पर मास्क लगे थे. चैहरा ढका हुआ था. सभी मीडिया के कैमरे से बच रहे थे. प्रशासन उन्हें ऐसा करने में भरपूर मदद कर रही थी. वहीं एक रिपोर्ट यह भी है कि हरियाणा सरकार ने 52 सीटों वाली एसी बसें भेजीं, जिन पर मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना हरियाणा लिखा था. और बैनर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की तस्वीरें लगी थीं.
ये तो हुई अब तक की रिपोर्ट. सदन में पहले हमले के बाकि सारे विपक्ष ने अब मौन धारण कर लिया. जिस तरह से पहले दिन सदन में आवाजें उठी थीं भारत वासियों के लिये एक उम्मीद जगी थी. लेकिन अब सभी विपक्षी नेताओं के सोशल मीडिया एकाउंट पर सन्नाटा पसरा हुआ है. सभी चुप हैं लेकिन अब पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने निर्वासितों को लेकर नई बात को जन्म दे दिया है. अब उन्हें निर्वाषित किये गए लोगों का अमृतसर हवाई अड्डा पर उतरने में भी बेईज्जती महसूस हो रही है. इसे लेकर उन्होंने केंद्र सरकार को निशाने पर लिया है. जहां नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा, “ हमारा अमृतसर शहर गुरुओं-पीरों और शहीदों की पवित्र धरती के रूप में जाना जाता है, इसे डिपोर्ट सेंटर बनाकर बदनाम करने की कोशिश न करें क्योंकि इस पवित्र धरती का बुरा सोचने वालों के नामों-निशान मिट गए। ये बयान पंजाब के आम आदमी पार्टी मुख्यमंत्री भगवंत मान सिंह की है. यानि वे भी मानते हैं कि अमेरिका ने जो अवैध प्रवासियों को वापस भेजा है उसने सही किया. क्योंकि इन्हें निर्वासितों का पंजाब की धरती पर उतरना भी जगह को दूषित करने की तरह सोचते हैं. हालांकि इस पुरे प्रकरण में पार्टी के मुखिया एवं पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपने अधिकारिक X हेंडल से अभी तक कुछ नहीं लिखा. उनका मौन बरतना दर्शाता है कि अमेरिका ने जो किया सही किया. अगर गलत होता तो वे इसे लेकर आग बबूला हो गए होते.
आब आते हैं सदन के नेता प्रतिपक्ष और विपक्ष के मुख्य चेहरा राहुल गांधी पर. राहुल गांधी ने भी इसे लेकर अपने अधिकारिक X हेंडल पर कुछ नहीं लिखा. यानि उन्हें भी लगता है कि अमेरिका और केंद्र सरकार ने जो किया उसमे गलत नहीं है. निर्वासितों के हाथों और पैरों में बेरियों लगना गलत नहीं है. जैसा कि उनकी चुप्पी बतलाता है.
इसी तरह अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, ममता वनर्जी, MK Stalin, उद्धव ठाकरे जैसे विपक्ष के मजबूत नेताओं ने कथित अवैध भारतीय आप्रवासीयों को किये गए डिपोर्ट को लेकर अधिकारीक रूप से कुछ नहीं कहा. जहां इस तरह की चुप्पी का सीधा मतलब यही होता है कि जो हो रहा है वो सही है. तो फिर किसी के हांथ में हथकड़ी लगे या पैर में बेड़ियां क्या फर्क पड़ता है. जो गलत है वो गलत है. इसमे चिखने चिल्लाने से क्या फायदा. अब सभी ने मान लिया है कि पहले जब चिल्लाने से कुछ नहीं हुआ तो अब क्या होगा.
आपको बता दें कि जितने भी भारतीय प्रवासियों को भारत वापस भेजा जा रहा है उसपर आरोप है कि वे अवैध रुप से अमेरिका में रह रहे थे. गलत तरिके से अमेरिका में दाखिल हुए. जहां डॉनल्ड ट्रम्प की नई ने इसे अवैध प्रवासियों को लेकर अपना रुख सख्त किया जहां ऐसा पाये जाने पर ऐसे लोगों को उसके देश वापस भेज रहे हैं.