Md Imran I पटना I 2 जनवरी I विधायक एवं AIMIM के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान ने मुस्लिम समाज की सामाजिक-मजहबी परंपराओं को लेकर अहम बयान दिया है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को अपनी कुछ परंपराओं पर गंभीर आत्ममंथन करने की ज़रूरत है, क्योंकि हर परंपरा समय और समाज के अनुकूल हो—यह ज़रूरी नहीं।
अख्तरुल इमान ने कहा कि मजहबी मामलों में अनुशासन और संयम बेहद अहम है। उन्होंने ऊँची आवाज़ में अज़ान देने के सवाल पर कहा कि इस विषय को संवेदनशीलता और समझदारी से देखना चाहिए, ताकि किसी तरह का सामाजिक टकराव न हो। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इस्लाम अमन और संतुलन का पैग़ाम देता है, न कि ज़बरदस्ती या टकराव का।
AIMIM नेता ने आगे कहा कि मुस्लिम समाज के रहन-सहन और खान-पान में भी समय के साथ सकारात्मक बदलाव की ज़रूरत है। उनका मानना है कि शिक्षा, व्यवहार और सामाजिक जिम्मेदारी पर ध्यान देकर ही समाज आगे बढ़ सकता है। अख्तरुल इमान के इस बयान को मुस्लिम समाज के भीतर सुधार और आत्मविश्लेषण की अपील के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि उनके बयान पर राजनीतिक और सामाजिक बहस छिड़ने की भी संभावना जताई जा रही है।