कोटद्वार घटना: पुलिस कार्रवाई पर जमाअत ने उठाए सवाल

Md Imran I दिल्ली I 2 जनवरी I कोटद्वार में हाल ही में हुई सांप्रदायिक घटना को लेकर जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष प्रो. सलीम इंजीनियर ने पुलिस की भूमिका और अब तक की गई कार्रवाई पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा कदम निष्पक्षता, जवाबदेही और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। मीडिया को जारी बयान में प्रो. सलीम इंजीनियर ने कहा कि जमाअत-ए-इस्लामी हिंद दीपक कुमार और विजय रावत के साहस की सराहना करती है, जिन्होंने कोटद्वार में सांप्रदायिक तनाव के दौरान अन्याय को रोकने के लिए हस्तक्षेप किया। उन्होंने कहा कि ऐसे नैतिक साहस के कार्य—जहाँ नागरिक डर और भेदभाव से ऊपर उठकर दूसरों की गरिमा और सुरक्षा की रक्षा करते हैं—देश की बुनियाद को मजबूत करते हैं। अन्याय और सांप्रदायिक नफरत के खिलाफ खड़ा होना ही इंसानियत को सशक्त बनाता है और एकजुट राष्ट्र की भावना को पुष्ट करता है। जमाअत के उपाध्यक्ष ने पुलिस की कार्रवाई, विशेषकर दीपक कुमार और विजय रावत के खिलाफ दर्ज FIR को लेकर गंभीर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि उपलब्ध वीडियो साक्ष्यों से स्पष्ट है कि दोनों के प्रयास रक्षात्मक थे और हिंसा को बढ़ने से रोकने के लिए थे, इसके बावजूद उन पर गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए। वहीं, पुलिस द्वारा स्वीकार किए जाने के बावजूद कि 31 जनवरी को एक भीड़ ने दीपक के घर को घेरा, मुस्लिम विरोधी नारे लगाए और खुली धमकियां दीं, इस मामले में FIR में किसी आरोपी का नाम नहीं होना चिंताजनक है। स्पष्ट वीडियो साक्ष्य होने के बावजूद अपराध को ‘अज्ञात लोगों’ के नाम पर दर्ज करना जवाबदेही को कमजोर करता है और चरमपंथी तत्वों को बढ़ावा देता है। दुकान मालिक वकील अहमद को मिली धमकियों का उल्लेख करते हुए प्रो. सलीम इंजीनियर ने कहा कि ऐसी घटनाएँ समानता, धार्मिक स्वतंत्रता और आजीविका के अधिकार जैसी संवैधानिक गारंटियों पर सीधा हमला हैं। उन्होंने पौड़ी गढ़वाल पुलिस से अपील की कि सभी FIR की निष्पक्ष समीक्षा की जाए, सांप्रदायिक सद्भाव की रक्षा करने वालों के खिलाफ लगाए गए बेवजह आरोप वापस लिए जाएँ और सभी दोषियों के विरुद्ध निष्पक्ष व प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। अंत में, जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने अन्याय के खिलाफ खड़े होने वालों के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए कहा कि संगठन सांप्रदायिक सद्भाव और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए, वर्तमान और भविष्य में, सभी उपलब्ध संवैधानिक साधनों के साथ काम करता रहेगा।