चारा घोटाले चौथे मामले में हुई राजद सुप्रीमो लालू यादव को सबसे बड़ी सजा, कहा, "मुझे परेशान कर सकते हैं, पराजित नहीं"

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MD IMRAN, 24/03/2018

राजद सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाले के चौथे केस में शनिवार को 14 साल की सजा सुनाई गई है। साथ ही लालू यादव पर 60 लाख रुपए का जुर्माना भी  लगाया गया है। इसके अलावा जुर्माना नहीं देने पर 1 साल की सजा और  काटनी होगी। दुमका कोषागार से 3.13 करोड़ रुपए की अवैध निकासी से जुड़े मामले में लालू को सीबीआई की  स्पेशल कोर्ट ने सोमवार को दोषी ठहराया था। बहुचर्चित चारा घोटाले से जुड़े मामलों में लालू को मिली ये सबसे बड़ी सजा है।


वहीँ लालू प्रसाद यादव ने विपक्ष पर जोड़दार निशाना साधते हुवे ट्विटर पर अपना आक्रोश व्यक्त किया और कहा , "मुझे परेशान कर सकते हैं, पराजित नहीं"


सीबीआई के विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह ने दुमका कोषागार से 3 करोड़, 13 लाख रुपए के गबन के मामले में 31 लोगों के खिलाफ सीबीआई की विशेष अदालत ने लालू यादव समेत  19 को दोषी करार दिया था। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र, पूर्व विधायक ध्रुव भगत, पूर्व सांसद जगदीश शर्मा, पूर्व मंत्री विद्या सागर निषाद, पूर्व विधायक आर के राणा समेत 12 लोगों को सबूतों के अभाव में बरी करने का आदेश दिया था।  गबन मामले में लालू को आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत सात साल कैद की सजा और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत भी सात साल कैद की सजा सुनाई है। लालू को सुनाई गई दोनों सजाएं एक के बाद एक चलेंगीं। इस तरह लालू प्रसाद को कुल 14 साल की सजा हुई । इसके  अलावा उन पर 30-30 लाख का कुल 60 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। लालू के खिलाफ चारा घोटाले मामले में 6 केस दर्ज हैं। अब तक चार मामलों में सजा का ऐलान हो  चुका है। लालू यादव को चार मामालों में अब तक 27.5 साल की सजा सुनाई जा चुकी है। इस समय लालू रांची की बिरसा मुंडा जेल में सजा काट रहे हैं।



आपको इस बहुचर्चित चारा घोटाले से सम्बंधित पूरी जानकारी बता दें :

1990 के दशक में हुए चारा घोटाला मामले में लालू पर पशुओं के चारे के नाम पर चाईबासा ट्रेजरी से 37.70 करोड़ रुपये निकालने का आरोप था। पूरा घटनाक्रम इस प्रकार है:

27 जनवरी 1996: पशुओं के चारा घोटाले के रूप में सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये की लूट सामने आई। चाईबासा ट्रेजरी से इसके लियेगलत तरीके से 37.6 करोड़ रुपए निकाले गए थे।
11 मार्च 1996: पटना हाई कोर्ट ने चारा घोटाले की जांच के लिए सीबीआई को निर्देश दिए।
19 मार्च 1996: सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश की पुष्टि करते हुए हाई कोर्ट की बैंच को निगरानी करने को कहा।
27 जुलाई 1997: सीबीआई ने मामले में आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव पर फंदा कसा।
30 जुलाई 1997: लालू प्रसाद ने सीबीआई अदालत के समक्ष समर्पण किया।
19 अगस्त 1998: लालू प्रसाद और राबड़ी देवी की आय से अधिक की सम्पत्ति का मामला दर्ज कराया गया।
4 अप्रैल 2000: लालू प्रसाद यादव के खिलाफ आरोप पत्र दर्ज हुआ और राबड़ी देवी को सह-आरोपी बनाया गया।
5 अप्रैल 2000: लालू प्रसाद और राबड़ी देवी का समर्पण, राबड़ी देवी को मिली जमानत।
9 जून 2000: अदालत में लालू प्रसाद के खिलाफ आरोप तय किए।
अक्टूबर 2001: सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के अलग राज्य बनने के बाद मामले को नए राज्य में ट्रांसफर कर दिया। इसके बाद लालू ने झारखंड में आत्मसमर्पण किया।
18 दिसंबर 2006: लालू प्रसाद और राबड़ी देवी को आय से अधिक सम्पत्ति के मामले में क्लीन चिट दी।
2000 से 2012 तक: मामले में करीब 350 लोगों की गवाही हुई। इस दौरान मामले के कई गवाहों की भी मौत हो गई।
17 मई 2012: सीबीआई की विशेष अदालत में लालू यादव पर इस मामले में कुछ नए आरोप तय किए। इसमें दिसंबर 1995       और जनवरी 1996 के बीच दुमका कोषागार से 3.13 करोड़  रुपये की धोखाधड़ी पूर्ण निकासी भी शामिल है।
17 सितंबर 2013: चारा घोटाला मामले में रांची की विशेष अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा।
30 सितंबर 2013: चारा घोटाला मामले में लालू प्रसाद यादव दोषी करार।
3 अक्टूबर 2013: चाईबासा कोषागार से कथित तौर पर 37.7 करोड़ की अवैध निकासी से जुड़े चारा घोटाले के एक मामले में लालू को 5 साल की सुनाई गई, साथ ही अदालत ने 25 लाख  का जुर्माना भी अदा करने को कहा था।
दिसंबर 2013: हाई कोर्ट ने लालू को जमानत दी।
मई, 2017: हाई कोर्ट के आठ मई के आदेश के बाद सुनवाई दोबारा शुरू हुई। हाई कोर्ट ने निचली अदालत से देवघर कोषागार से अवैध निकासी मामले में उनके खिलाफ अलग से मुकदमा 
चलाने को कहा।
23 दिसंबर 2017: सीबीआई की विशेष अदालत ने लालू और 17 अन्य को दोषी करार दिया।
6 जनवरी 2018: चारा घोटाले के दूसरे देवघर मामले में लालू को 3.5 साल की सजा सुनाई गई।
24 जनवरी 2018: चारा घोटाले के तीसरे और अन्य चाईबासा मामले में भी लालू को दोषी करार दिया गया और पांच साल की सजा सुनाई गई। ये 33.61 करोड़ के गबन का मामला था। 
24 मार्च 2018: चारा घोटाले के दुमका कोषागार मामले में लालू को 7-7 की सजा। साथ ही 30-30 लाख का जुर्माना।

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